जीवन(एक नया युग) - सबका सूरज [सूरज सोनी]
आज जीवन कितना हीन होता जा
रहा है , अपराध बढ़ रहे हैं ,लोग आपस में ही धर्म , जाति के नाम पर
लड़ रहे हैं | सब अपने अपने धर्मों को महान बताते हुए अपने मे ही लगे हुए है | जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं | मै कहता हूँ कौन सा ऐसा ईश्वर, भगवान, अल्लाह और गॉड है जो ऐसी मानसिकता रखकर इस जीवन की रचना करेगा की सारे जीव जन्तु आपस मे ही एक दिन लड़ेंगे बोलिए है कोई जवाब ? नहीं ना | तो फिर आप कहेंगे क्या है आखिर सत्य?
लड़ रहे हैं | सब अपने अपने धर्मों को महान बताते हुए अपने मे ही लगे हुए है | जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं | मै कहता हूँ कौन सा ऐसा ईश्वर, भगवान, अल्लाह और गॉड है जो ऐसी मानसिकता रखकर इस जीवन की रचना करेगा की सारे जीव जन्तु आपस मे ही एक दिन लड़ेंगे बोलिए है कोई जवाब ? नहीं ना | तो फिर आप कहेंगे क्या है आखिर सत्य?
जबकि मैंने अब तक जो अनुभव
किया और माना की सत्य क्या है और जान लिया ,
न तो कोई धर्म , न तो कोई भगवान,
अल्लाह और गॉड है इस पृथ्वी पर | सब कोई न कोई अपने आपको
विद्वानी मानकर और सर्वश्रेष्ठ मानकर हर पीढ़ियों में नए धर्म और नए युगों की
शुरुआत की सिर्फ अपनी प्रसिद्धि पाने के लिए | मैं यह नहीं
कह रहा की कोई गॉड , भगवान, अल्लाह, जो भी आप लोग मानते हो, नहीं है | बल्कि बस केवल एक शक्ति (power) है, जिसकी वजह से ब्रह्मांड (universe) का जन्म हुआ , जीवन की उत्पत्ति हुई और जीव जन्तुओ की, उसके
पश्चात सब अपनी अपनी बुद्धि , मानसिकता के अनुसार बढ़ते गए |
जब इस ब्रह्मांड की शुरुआत हुई होगी और पृथ्वी पर जीवन शुरू
हुआ होगा , तब न तो कोई अच्छाई और बुराई, सुख - दुख
, न तो कोई धर्म कुछ नहीं था | ये सब बस इंसानी कल्पना के अनुसार बनते गए | इंसान
की बुद्धि और मानसिकता का विकास जैसे जैसे बढ़ता गया , वैसे
वैसे नई नई चीजें और खोज हुई चाहे वो कुछ भी हो , वह भी
आवश्यकता अनुसार | फिर आप कहेंगे भगवान कहा से आए , तो उसका भी जवाब है , जब कुछ जीवों ने ताकतवर बनकर
दूसरों जीवों को प्रताड़ित किया होगा तब जीवों
के अंदर डर का प्रवेश हुआ होगा और शैतान की उत्पत्ति हुई होगी, तब उन्होने अपने अपने अनुसार धर्म और भगवान को बनाया या किसी इंसान को ही
भगवान माना जो ताकतवर और उनकी रक्षा की हो| बाकी कुछ भी सत्य
नहीं है |
हम लोग न जाने किस – किस
चीजों को लेकर आपस में लड़ रहे है और इस पृथ्वी , जीवन और जीव जंतुओं का विकास करने में लगे हैं , सब
अपने अपने देश अपने अपने समाज और अपने आपको को महान बनाने में लगे हुए हैं | कोई इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा है ,
बस मेरे अंदर जो सोच है
और जो मैंने माना है , अगर कुछ
भी शुरू हुआ है तो वह खत्म भी होता है, जैसा की उदाहरण है
मनुष्य का जीवन , वैसे ही यह हमारी पृथ्वी और ब्रह्मांड है , जो एक शक्ति (power) के कारण शुरू हुआ है कभी खत्म
होगा और जब होगा जब हम मानव जाति उस शक्ति (power) को जान
जायेंगे या फिर उसके पास तक पहुँच जायेंगे , बस उससे तनिक
दूर , क्यूंकि एक शक्ति का विनाश तभी होता है जब दूसरी शक्ति
उसके बराबर हो |
हम लोग सोचते हैं कि यही
हमारी एक पृथ्वी है जिसमे हमने जन्म लिया है , और हमे इसी मे मरने से पहले कुछ
न कुछ करना है चाहे अपने लिए हो , अपने परिवार के लिए ,अपने समाज के लिए या अपने देश
के लिए ताकि हमारा भी नाम हो , तो भूल जाइए |
इस पृथ्वी कि जैसी न जाने
कितनी पृथ्वी होंगी , न जाने कितना जीवन
होगा जोकि एकदम सत्य है | मै तो बस जिस पृथ्वी में हूँ अभी , उसके बारे में है ये सब , जिसे हम समझ नहीं पा रहें
है |
हम बस केवल अपने निजी
स्वार्थ, यश, नाम के लिए
कितना आगे बढ़ते जा रहे हैं न जाने कौन कौन कृत्य करते जा रहे हैं , जो कि कहीं न कहीं जाने अनजाने में इस पृथ्वी और हमारे लिए सर्वनाश का
कारण है |
मैं तो शायद कुछ समय बाद
शायद इस दुनिया में नहीं रहूँगा , मुझे पता
है बाद में ये दुनिया , पृथ्वी भी नहीं रहेगी , ये भी मेरी तरह एक दिन खत्म हो जाएगी |
अगर जब इसे खत्म होना ही
है तो ,हम कहेंगे हमे इससे क्या क्या समस्या
है , जब खत्म होगी तब देखा जाएगा,
क्यूँ आपको होने वाली पीढ़ियो के बारे चिंता नहीं है क्या या इस पृथ्वी की बोलिए |
अरे भाई! एक उदाहरण देता हूँ :
अगर मान लो तुमहरे पास एक
सीमित धन है , उसे तुम्हें एक वर्ष
तक चलाना है, तो कैसे चलाओगे? आप को
उसके लिए एक योजना बनानी पड़ेगी कि हम प्रतिदिन कम से कम खर्च करे जितना भी सके
ताकि ज्यादा दिन चल सके ,करोगे ना |
ठीक उसी प्रकार अगर अपनी
पृथ्वी को ज्यादा से ज्यादा दिनों तक जीवित रखना चाहते हैं , तो उसके संसाधनों का कम से कम प्रयोग करना
होगा |
आज मैं आपको एक गूढ़ रहस्य
के बारे में बताता हूँ :
कई महान व्यक्तियों ने
बताया है कि हमारा शरीर पाँच तत्वों से मिलकर बना है –
1. जल 2. मिट्टी 3. वायु (हवा) 4. आग 5. आकाश
जोकि देखा जाए तो कहीं ना
कहीं सत्य है , लेकिन क्या आपने इसके
पीछे छिपे रहस्य को जानने कि कोशिश की या नहीं की –
जब इन्हीं चीजों से मिलकर
हमारा जीवन है तो इन्हीं चीजों के कारण हमारा सर्वनाश होगा जो कि कटु सत्य है |
जैसे कि अगर हम पहले तत्व
कि बात करते हैं :-
1. जल
अगर जल से हमारे जीवन कि
शुरुआत हुई है तो खत्म कैसे होगा, मैं आप
को बताता हूँ , अभी आपने कई जगहों के बारे में सुना होगा , जल का अभाव है , और उसके कारण लोगों कई लोगों मौतें
हुईं हैं | वैसे ही एक दिन सारी पृथ्वी का जल समाप्त हो
जाएगा |
यह विनाश का एक कारण |
आग (अग्नि)
अगर आग से हमारा जीवन
शुरू हुआ है तो खत्म कैसे होगा ,कभी आपने
समाचारों में सुना होगा कि ज्यादा गर्मी पड़ने से या आग लगने से मृत्यु हो गयी |
वैसे ही जब सूरज जो एक
अति ज्वलनशील गृह है अपने अंदर कई गुना अग्नि ऊर्जा को समेटे हुए है , आप देखतें हैं कि गर्मियों मे तपन होती तो
हमे कितना असहनीय होता है , एक दिन इसी तरह ये तपन इतनी
बढ़ेगी कि इसी अग्नि में जलकर मर जायेंगे , और हमारी पृथ्वी
के विनाश का कारण बनेगी |
यह विनाश का दूसरा कारण |
वायु (हवा)
अगर हमारे जीवन कि शुरुआत
हवा से हुई है तो खत्म कैसे होगा ?
आज तक आपने सुना होगा
जहरीली हवाओं और गैसों के कारण कई लोगों कि मृत्यु हो गयी | वायु खत्म नहीं, वरन्
इतनी जहरीली हो जाएगी कि एक दिन सारे जीव –जंतुओं का सांस
लेना मुश्किल हो जाएगा, जैसा कि कई जगहों पर इसका कुछ असर
हुआ भी था, जब ये हर जगह हो जाएगी तभी विनाश कि उत्पत्ति
होगी | जोकि विनाश का मुख्य कारण है |
वरन् इसके कारक भी हम
बनेंगे , क्यूंकि वायु को जहरीला बनाने का काम
कोई अल्लाह ,भगवान और गॉड नहीं कर रहा है बल्कि हम इंसान ही
कर रहें हैं |
यह विनाश का तीसरा कारण |
मिट्टी
अब मिट्टी कि बात करें ,तो अब तक आपने सुना होगा अपने आस पास कि
कितनी जगहों को हमने नरक बना दिया होगा , जो एकदम से बंजर हो
गईं होंगी या कुछ उगाने योग्य नहीं बचीं होंगी और कुछ जगह तो खत्म ही हो गयी है |
इसकी वजह से धीरे – धीरे खाने योग्य सारी चीजों की पैदावार खत्म
होती जाएगी | जब हमारी मिट्टी इतनी दूषित हो जाएगी हो तो
हमारे पास कुछ नहीं बचेगा , जिसे हम धीरे – धीरे खत्म कर
रहें हैं |
यह विनाश का चौथा कारण |
आकाश
अब आकाश की बात करें तो
आकाश तो बस दिखता है , पर है
नहीं पर अगर हम मूल रूप से बात करें तो एक ओज़ोन परत है पृथ्वी के उपर , आपने कभी समाचारों मे सुना होगा की उसमें छिद्र हो गया है , अगर यह धीरे – धीरे बढ़ता गया तो हमारे लिए खतरा बन सकता है जो कि विनाश
का पाँचवाँ कारण बनेगा , क्यूंकि अगर ओज़ोन परत दिन प्रतिदिन
खत्म होती रही तो सूर्य की खतरनाक किरणों का प्रवेश बढ़ता जाएगा |
वैसे देखा जाए तो विनाश
के मूलतः चार कारण है वायु ,जल ,अग्नि और मिट्टी है ,क्यूंकि अगर यही चार खत्म हो
जाएगा तो आकाश किस काम का |
अब तो आप को समझ मे आ ही गया होगा कि कैसे
कैसे हम विनाश कि ओर बढ़ रहें हैं|
अगर हमें अपनी पृथ्वी को
ज्यादा से जायदा दिन तक सुरक्षित रखना और बचाना है , तो पृथ्वी के संसाधनों के कम से कम करना होगा और इन पाँच तत्वों को
ज्यादा समय तक बचाना पड़ेगा | क्यूंकि जिस दिन ये सारे तत्व
दूषित या खत्म हो जाएंगे उस दिन सब खत्म हो जाएगा | अपने लिए
न सही तो अपने आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे मे सोचिए | इसके हम सबको ये अपना देश, अपना धर्म, अपना समाज, अपनी जाति, अपनी
दुनिया सब को भूलकर एक होना पड़ेगा , क्यूकि लड़ने मे और अपने
आपको महान बनाने के चक्कर जो विनाश हो रहा है वो अपने ही गृह पृथ्वी का हो रहा है
और यह गृह अपना ही है | कुछ वैज्ञानिक दूसरों ग्रहों पर जीवन
खोजने के चक्कर मे अपने ही गृह का जीवन खत्म करने में लगे हैं, मान लिया कि दूसरों ग्रहो मे जीवन खोज भी लिया तो क्या हमारी पीढ़िया वहाँ
पहुँच पायेंगी | नहीं ! तो कृपया इस बारे में आप सभी सोचिए | धन्यवाद ! अभी आगे बाकी है.........|
जैसा की आप सब जानते है
आजकल किसी धर्म और किसी समाज में सच्चाई नहीं रह गई है।
सबकी पोल खुल गई है । हर
कोई आपस में ही लड़ रहा है न तो कोई धर्म यहाँ पर शुरू से था न कोई धर्म अंत में
बचेगा। इंसान की सोच और कल्पना के हिसाब से जो उसकी मानसिकता है या पैदा होते उनके
दिमाग में जो भर दिया जाता है वही वो आगे प्रयोग करता है ।
आज का युग जिस समय मैं
यहाँ हूँ इस पल जब भी यहाँ चारों ओर देखता हूँ बस हर तरफ एक दूसरे में लड़ाई एक
दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करना यही उद्देश्य बन गया है ।
लग रहा है अब एक नया युग
और नया वक्त आने की जरूरत हो।
एक नए धर्म ,एक नए ईश्वर, एक नए
समाज ,एक नई जाती ,एक नये परिवार की और
एक नये इंसान की जैसे और भी चीजें फैली हुई हैं । ये और कहीं से नहीं होगा , ये हम इन्सानो को ही सोचना और समझना होगा एवं एक नई शुरुआत करनी पड़ेगी ।
नहीं तो ये इंसान ऐसे ही
अपने फायदे के लिए एक दूसरे का कत्ले आम करते रहेंगे और बस एक दूसरे को आपस में
लड़ाते रहेंगे, आप क्या चाहते हैं की
इस पृथ्वी से जीवन का नामोनिशान मिट जाए ।
आज इंसान को खुद का रक्षक
, खुद का ईश्वर बनकर खुद ही तय करना
होगा कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उसके लिए हमें सबसे पहले परिवार वाले
अहसास को निकालना पड़ेगा।
सबसे पहले आपको अपने
दिमाग और अपनी सोच को कई लाखों वर्षों पूर्व कि ओर ले जाना पड़ेगा;
जब इस धरती पर हम
मनुष्यों का जीवन शुरू हुआ तब कुछ नहीं था ,केवल
इंसान और जीवन के दो मूलरूप थे
एक नर एक मादा , बस एक प्रजनन क्रिया के जरिये ही नये
मनुष्य जन्म लेते हैं , बस इसी प्रक्रिया कि पुनरावृत्ति
होती रहती है और कुछ नहीं ।
जब कुछ लोग मिलकर इकठ्ठा
रहने लगे तो एक नई सोच परिवार जन्म लिया वो भी उनकी खुद कि मानसिकता के आधार पर और
कुछ नहीं ।
परिवार के बाद बात करते
हैं जाति कि तो इन्सानों ने जातियों का निर्माण अपने अपने कर्म के अनुसार किया न
कि इसे पहले से इन्सानों को प्रदान किया गया है । हमें अपनी लगी जातियों को अपने
दिमाग से खुद मिटाना होगा ।
समाज :
अब बात करते हैं समाज कि
तो जब इन्सानों ने अपने अपने परिवारों को लेकर अपने को जातियों के रूप मे
विश्थापित किया , फिर सब एक ही जगह पर
एकत्रित रहने लगे , तब जाकर एक समाज का निर्माण हुआ । जिसे
आज हम समाज कहते है वो बस एक कल्पना है और इन्सानो द्वारा दिया गया नाम है ।
धर्म :
अब बात करते हैं धर्म कि
तो आप देखिये जब तीन चीजें तैयार हो गई जाति, परिवार
और समाज , तो जब इन चीजों का विस्तार हुआ, उसके बाद जो जिस जलवायु , जिस प्रकृति में
अपना जीवन यापन करता रहा , वहाँ पर उसने अपने बुद्धि और विवेक के
अनुसार एक नई चीज
बनाई जिसे उसने धर्म का
नाम दिया वो भी अपने अपने रहन सहन के अनुसार ।
तभी से अनेक धर्मों का
उदय हुआ । और अपने अपने मुताबिक सब ने हर धर्मों के ईश्वर बनाए। कुछ इन्सानों तो
इंसान को ही भगवान का अवतार बनाकर भगवान बना दिया , क्यूंकी उस इंसान (भगवान ) ने लोगों को दूसरे ताकतवर इंसान (शैतान) से बचाया
तो वो ही उनके भगवान हो गए और कुछ नहीं ।
कुछ इंसानों ने नई राह
दिखाई और नए यानि अपने तरीके से लोगों को जीवन जीना सिखाया ,
तो वह भी भगवान बन गए और
बाद लोग उनके ही नाम पर धर्म बना दिया और उनकी पुजा करने लगे।
इंसान आज के युग में इतना
भयभीत हो गया है की किस धर्म का पालन करे , कौन सा
धर्म सही है , कौन सा ईश्वर सत्य है ,
इंसान को समझ में नहीं आ रहा है।
जबकि ये उन्ही इंसानों की
कल्पना और उन्ही की खोज है । आज अपने ही बनाए बुनियादों मे खो गया है ।
आप अपने चारों तरफ देखिये
सभी धर्मों में क्या समान है , कौन सी
बात है जो इस पृथ्वी पर शुरू से है वह है जीवन और मृत्यु ।
ये हर धर्म में सच था , सच है और सच रहेगा । क्या उनके मरने के
तरीके अलग अलग हैं ,नहीं ना । तो क्या करें । तब
आप सभी को कोई कितना भी
तर्क दे , चाहे कोई भी धर्म हो , या कोई भी ईश्वर हो , मत मानिए । इस जीवन और पृथ्वी
और इस प्रकृति की पावर (शक्ति ) पर विश्वास करिए ।
क्या आप ने आज तक इंसान
को छोड़कर , किसी पशु या किसी
पक्षियों में कोई धर्म या कोई ईश्वर देखा है , नहीं ना , क्यूंकी उनके पास न बोलने की शक्ति, न ही इंसानों
से ज्यादा सोचने की शक्ति इसलिए वो सभी आपस में एक समान जीते हैं अपने कर्म के
अनुसार ।
क्या पशुओं और पक्षियों
का हमारी तरह जीना मरना सत्य नहीं है । सत्य है ना ।
तो क्यूँ आप पशुओं और
पक्षियों से बद्तर होते हैं जा रहें हैं । जिस प्रकार ये सारे जीव जन्तु आपस में बिना धर्म और बिना जाति के रह रहें हैं
, क्या हम सब नहीं जी सकते हैं ?
आज जरूरत है एक नए युग और
नए इंसानों की लेकिन ये पैदा नहीं होंगे , बस आप
अपनी सोच बदलने से खुद-ब-खुद बन सकते हैं ।
मेरी शक्ति ( Power ) :-
क्षिपाजगस { क्षिति, पावक, जल, गगन, समीरा, } (अग्नि, जल, मिट्टी, आकाश, हवा)
WAFES ( Water, Air, Fire, Earth, Sky )
धन्यवाद !
सबका सूरज ( Wafes – The Power )
उर्फ सूरज सोनी ।
j
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